9 हिंदी स्पर्श

दोहे

रहीम

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥

प्रेमकाबंधनकिसीधागेकेसमानहोताहैजिसेकभीभीझटकेसेतोड़नहींदेनाचाहिएबल्किउसकीहिफाजतकरनीचाहिए।क्योंकिजबकोईधागाएकबारटूटजाताहैतोफिरउसेजोड़ानहींजासकता।जोड़नेकीकोशिशमेंउसधागेमेंगाँठपड़जातीहै।किसीसेरिश्ताजबएकबारटूटजाताहैतोफिरउसरिश्तेकोदोबाराजोड़ानहींजासकता।



रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।
सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहै कोय॥

अपने दर्द को दूसरों से छुपा कर ही रखना चाहिए।जबआपकादर्दकिसीअन्यकोपताचलताहैतोलोगउसकामजाकहीउड़ातेहैं।कोई भी आपके दर्द को बाँट नहीं सकता।

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥

एक बार में कोई एक कार्य ही करना चाहिए।एककामकेपूराहोनेसेकईकामअपनेआपहोजातेहैं।यदिएकहीसाथआपकईलक्ष्यकोप्राप्तकरनेकीकोशिशकरेंगेतोकुछभीहाथनहींआता।यहवैसेहीहैजैसेजड़मेंपानीडालनेसेहीकिसीपौधेमेंफूलऔरफलआतेहैं।

चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।
जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस॥

जबरामकोबनवासमिलाथातोवेचित्रकूटमेंरहनेगयेथे।चित्रकूटघनघोरवनमेंहोनेकेकारणरहनेलायकजगहनहींथी।ऐसीजगहपरवहीरहनेजाताहैजिसपरकोईभारीविपत्तिआतीहै।

दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
ज्यों रहीम नट कुंडली, सिमिटि कूदि चढ़ि जाहिं॥

किसीभीदोहेमेंकमशब्दोंमेंहीबहुतबड़ाअर्थछिपाहोताहै।यह वैसे ही होता है जैसे नट की कुंडली होती है।नटअपनीकुंडलीमेंसिमटकरतरहतरहकेविस्मयकारीकरतबदिखादेताहै।



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